पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से जूझ रहे किसानों को मिल रहा घेरबाड़ योजना का लाभ

 

खबर काम की
पौड़ी। जनपद के पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से जूझ रहे किसानों के लिए कृषि विभाग की घेरबाड़ योजना कारगर साबित हो रही है। जिला योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 102 परियोजनाओं के से खेतों की घेरबाड़ कराई गई, जिससे कुल 339 हेक्टेयर कृषि भूमि सुरक्षित हुई है। इन कार्यों पर 339 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी।

प्रभारी कृषि अधिकारी मनविंदर कौर के अनुसार एकेश्वर, जयहरीखाल, पोखड़ा, थलीसैंण, खिसू, पाबौ, रिखणीखाल, नैनीडांडा, बीरोंखाल, पौड़ी, कोट, कल्जीखाल, दुगड्डा, द्वारीखाल और यमकेश्वर विकासखंडों के चयनित गांवों में मजबूत फेंसिंग कराई गई। अधिकांश परियोजनाओं पर 3 से 6 लाख रुपये तक खर्च किए गए हैं, जिससे जंगली सूअर, बंदर और अन्य वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।

बीरोंखाल ब्लॉक के नौगांव गांव में 130 मीटर लंबी घेरबाड़ से लगभग 80 खेत सुरक्षित हुए हैं, जिससे उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी गई है। किसानों ने योजना की सराहना करते हुए राहत की बात कही है।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि फसलों की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता के आधार पर घेरबाड़ कार्य कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस योजना का विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके और खेती को सुरक्षित व लाभकारी बनाया जा सके।

 

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