परमार्थ निकेतन से 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन
खबर काम की
ऋषिकेश। हिमालय की पावन गोद, माँ गंगा की निर्मल एवं अविरल धारा तथा परमार्थ निकेतन के दिव्य आध्यात्मिक वातावरण में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन अद्भुत, अलौकिक और ऐतिहासिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती तथा विश्व के अनेक देशों से आये राजदूतों, राजनयिकों, उच्चायुक्तों, विदेशी प्रतिनिधियों एवं सैकड़ों की संख्या में आये योग साधकों ने गंगा तट पर एक साथ योगाभ्यास कर संपूर्ण विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन, शांति और मानव एकता का दिव्य संदेश दिया।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रज्ज्वलित दीपों की ज्योति ने समस्त मानवता के उज्ज्वल भविष्य की आभा को आलोकित किया। समापन विश्व शांति यज्ञ के साथ हुआ, जिसमें सम्पूर्ण विश्व के कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, मानवता की सुख-समृद्धि और वैश्विक शांति के लिए विशेष आहुतियाँ अर्पित की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का विज्ञान है। योग भारतीय ऋषि परम्परा का वह अमूल्य उपहार है जिसने सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन, संतुलित मन और शांत चेतना का मार्ग प्रदान किया है।
आज सम्पूर्ण मानवता जिस तनाव, अवसाद, हिंसा, असंतुलन और पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है, उसका स्थायी समाधान योग, ध्यान और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति में निहित है।
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि योग किसी धर्म, जाति, भाषा या राष्ट्र की सीमाओं में बंधा नहीं है। योग भारत द्वारा सम्पूर्ण मानवता के साथ साझा की अनुपम धरोहर है। जब हम स्वयं से जुड़ते हैं तभी हम प्रकृति से, समाज से और ईश्वर से भी जुड पाते हैं। योग का वास्तविक अर्थ है विभाजन नहीं, संगम है; संघर्ष नहीं, समन्वय; अशांति नहीं, आत्मशांति।
इस अवसर पर विश्व के अनेक देशों से आए राजदूतों, राजनयिकों और उच्चायुक्तों ने गंगा तट पर सामूहिक योगाभ्यास कर भारत की सनातन संस्कृति के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। सभी ने स्वीकार किया कि भारत ने योग के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन की दिशा प्रदान की है। योग ने विश्व के देशों को केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक निकटता के सूत्र में भी बाँधा है।
माँ गंगा की निर्मल धारा, हिमालय से बहती शीतल वायु, वेद मंत्रों की पावन ध्वनि, प्रातःकालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें और परमार्थ निकेतन का दिव्य वातावरण विदेशी अतिथियों एवं योग साधकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया। अनेक विदेशी सैलानी भारतीय योग परम्परा में पूरी तरह भाव-विभोर होकर योग, प्राणायाम और ध्यान में लीन दिखाई दिए। उनके चेहरों पर प्रसन्नता, संतुलन और आत्मिक शांति स्पष्ट झलक रही थी।
परमार्थ निकेतन से योग मानवता का भविष्य है, स्वस्थ शरीर के लिए योग, योग की डोज़ हर रोज़, इसलिए योग करें, रोज़ करें और मौज करें, करो योग, रहो निरोग के दिव्य स्वरों की गूंज विश्व के अनेक देशों तक पहुंची और भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने योग को न केवल हर व्यक्ति, हर घर, हर घट, हर घाट ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानतवा तक पंहुचा दिया।
परमार्थ निकेतन में आज अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पूरा दिन योग, ध्यान, प्राणायाम का अभ्यास कराया जा रहा है। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का यह भव्य आयोजन एक बार पुनः सिद्ध करता है कि भारत केवल योग की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि विश्व को शांति, सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से जोड़ने वाला विश्वगुरु है।
योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वाेत्तम कला है। आइए, 12 वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि योग को केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन का उत्साह बनाएँगे। स्वयं स्वस्थ रहेंगे, समाज को स्वस्थ बनाएँगे और भारत की सनातन योग परम्परा के इस दिव्य संदेश को सम्पूर्ण विश्व तक पहुँचाएँगे।करो योग, रहो निरोग। योग करें, रोज़ करें और मौज करें।
इस अवसर पर थाईलैंड,राजदूत, एच.ई. चवनार्ट थांगसुम्फांत, इजराइल, मानद वाणिज्यदूत, जॉयश्री वर्मा, गुयाना, उच्चायुक्त, एच.ई. श्री धरमकुमार सीराज, सर्बिया, राजदूत, एच.ई. सिनिशा पाविक, नेपाल, प्रभारी राजदूत (चार्ज डी अफेयर्स), एच.ई. डॉ. सुरेन्द्र थापा, बांग्लादेश, उच्चायुक्त, एच.ई. एम. रियाज हमीदुल्लाह, वियतनाम, प्रथम सचिव, होआंग थी येन, फिलीपींस, द्वितीय सचिव, मेलिसा ऐन टेलन, पनामा, कौंसल, एडिजा जिमेनेजय त्रिनिदाद एवं टोबैगो, प्रशासनिक अटैची, चार्लीन रामसुंदर, जॉर्जिया, उप मिशन प्रमुख, बर्दिया बेकाउरी, लिथुआनिया, उप मिशन प्रमुख, लुकास किसिएलियू, मालदीव, सचिव, राशु काशिफ, पलाऊ, मानद वाणिज्यदूत, नीरज ए. शर्मा, गैबॉन, प्रभारी राजदूत, एच.ई. फ्रांसिस जुएम्बा, कांगो (ब्राजाविल), प्रथम सचिव, सिरियाक गनवाला, इक्वेटोरियल गिनी, काउंसलर, लियोनार्डाे मोला लाप्लाटा मुमय बोत्सवाना, सचिव, ल प्रियंका साहनी, रूस, सांस्कृतिक काउंसलर, अनास्तासिया इल्युशिनाय श्रीलंका, मंत्री (काउंसलर), निरोशा के. हेराथ की गरिमामयी उपस्थिति रही।
