Dehradun: “क्लाइमेट चेंज-बच्चों की नजर से“ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित 

 

 

खबर काम की
देहरादून।  जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को बच्चों के अनुभवों और स्थानीय पर्यावरण से जोड़ते हुए धाद के हरेला अभियान के अंतर्गत गुरुवार को दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज-बच्चों की नजर से“ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने अपने घर, आसपास और स्थानीय परिवेश में प्रकृति में आए बदलावों का अध्ययन प्रस्तुत किया। बताया कि बदलते मौसम का असर केवल वैश्विक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय जैव विविधता, खेती और जनजीवन पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

कार्यक्रम में बच्चों ने पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं, फसलों और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े अपने अवलोकन साझा किए। बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम के स्वरूप में आए बदलावों का सीधा प्रभाव स्थानीय पारिस्थितिकी पर पड़ा है।

छात्रा अंतरिक्षा प्रताप सिंह ने कहा कि जुगनू, केंचुआ और अन्य सूक्ष्म जीव पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन बदलती जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण इनकी संख्या लगातार घट रही है। आमना खान ने बताया कि हर वर्ष बढ़ रही गर्मी और मौसम के अनियमित बदलावों के कारण मच्छरों और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।

दिव्यांशी काम्बोज ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और बदलते मौसम के कारण कभी देहरादून की पहचान रही लाल बासमती धान की किस्म अब लगभग समाप्त हो चुकी है। सदब ने बताया कि उनके क्षेत्र कौलागढ़ में पहले बड़ी संख्या में दिखाई देने वाली गौरैया अब लगभग गायब हो चुकी है, जो स्थानीय जैव विविधता में आ रहे बदलाव का संकेत है।

वहीं, धाद के सचिव हिमांशु आहूजा ने कहा कि इस वर्ष बच्चों के दृष्टिकोण से जलवायु परिवर्तन को समझने की पहल की गई है, ताकि आने वाली पीढ़ी के अनुभवों और चिंताओं को भी पर्यावरणीय विमर्श का हिस्सा बनाया जा सके।

मौके पर धाद के उपाध्यक्ष गणेश चन्द्र उनियाल, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के विजय भट्ट, डॉ एसएस खैरा, देवेन्द्र कांडपाल, तन्मय ममगाईं, आलोक सरीन, बीएस रावत, महावीर रावत, प्रदीप डोभाल, अनिमेष गुप्ता, नरेन्द्र सिंह रावत, कल्पना बहुगुणा, डॉ विद्या सिंह, आशा डोभाल, नीना रावत, ममता डोभाल आदि मौजूद रहे।