खबर काम की
देहरादून। बदरीनाथ में आयोजित एक संगीत उत्सव की वायरल वीडियो को लेकर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रतिक्रिया दी। कहा कि धाम में सांस्कृति कार्यक्रमों पर प्रतिबंध की बात सरासर गलत है।
संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि बदरीनाथ के कपाट खुलने के दिन वर्षों से जारी परंपरा के तहत सेना का बैंड संगीत की प्रस्तुति देता है। कहा कि बदरीनाथ धाम केवल एक मंदिर ही नहीं, बल्कि उर्वशी पीठ भी है। यहां संगीत के माध्यम से ही ईश्वर की आराधना और स्तुति की जाती है। संगीत यहां की आध्यात्मिक और वैदिक परम्परा का अभिन्न अंग रहा है, इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
महाराज ने कहा कि सीमान्त गांव माणा में वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान परम्परागत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। महाराज ने बदरीनाथ की पौराणिक महत्ता पर कहा कि यहां नर और नारायण पर्वत विराजमान हैं और यहां की पूजा पद्धति परम वैष्णव पद्धति है। कहा कि बदरीनाथ मंदिर के अंदर शंख नहीं बजाया जाता है। यहां शंखनाद करना पूरी तरह वर्जित है। क्योंकि वह हड्डी का बना होता है परन्तु मंदिर परिसर के बाहर शंख बजाने पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है। यह हमारी पूजा पद्धति की विशेषता है, प्रतिबंध नहीं।
महाराज ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी बदरीनाथ धाम में अनेक अवसरों पर इस प्रकार के धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। ऐसे में यह कहना कि बदरीनाथ में इस प्रकार के कार्यक्रम नहीं हो सकते, पूरी तरह से निराधार है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें, देवभूमि की गरिमा को बनाए रखने में सहयोग करें। सरकार केदारनाथ धाम सहित चारों धामों की पवित्रता, परम्परा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
