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ऋषिकेश। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की समृद्ध लोक संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं के अनुरूप छोटी दीपावली को गढ़वाल के प्रमुख लोकपर्व बग्वाल के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। ऋषिकेश नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने इस पर्व को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाते हुए गौ माता की पूजा-अर्चना की।
शनिवार को सुबह से ही घरों में पर्व की तैयारियां शुरू हो गई थीं। लोगों ने अपनी गायों को स्नान कराकर उनकी पूजा की तथा उनके सींगों पर सरसों का तेल लगाकर उन्हें फूल-मालाओं से सजाया। इसके साथ ही गाय माता को मंडुवे और चावल से बने पारंपरिक पकवानों (बाड़ी) का भोग लगाया गया। नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजे नेगी ने बताया कि उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में छोटी दीपावली को बग्वाल पर्व के रूप में मनाने की प्राचीन परंपरा रही है। दीपावली के ठीक 11 दिन बाद इगास बग्वाल का पर्व मनाया जाता है। दोनों ही पर्वों का गौ माता की पूजा और पहाड़ की लोक संस्कृति से गहरा संबंध है।
डॉ. नेगी ने बताया कि बग्वाल के अवसर पर गाय माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उन्हें पूरी, पकौड़े, स्वाले, चावल और मंडुवे से बने पारंपरिक पकवानों का भोग लगाया जाता है। इस दिन रक्षाबंधन पर हाथ में बांधे गए रक्षासूत्र को गाय के बछड़े की पूंछ पर बांधकर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना के साथ आशीर्वाद भी मांगा जाता है।
उन्होंने कहा कि बग्वाल और इगास जैसे पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति सम्मान और पशुधन के महत्व को दर्शाते हैं। नई पीढ़ी को भी अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
डॉ. नेगी ने सभी प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि दीपावली एवं बग्वाल का पर्व पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाएं। अत्यधिक तेज आवाज वाले पटाखों से ध्वनि एवं वायु प्रदूषण बढ़ता है और इससे बुजुर्गों, बच्चों, पशु-पक्षियों को भी परेशानी होती है। इसलिए सभी लोग इको-फ्रेंडली दीपावली मनाने का संकल्प लें।
उन्होंने देश की सीमाओं पर तैनात वीर जवानों के सम्मान में एक दीपक उनके नाम जलाने की अपील करते हुए कहा कि हमारे सैनिक अपने परिवारों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में दिन-रात समर्पित हैं। उनके त्याग और बलिदान को नमन करना हम सभी का कर्तव्य है।
