खबर काम की
ऋषिकेश। (एम्स) ऋषिकेश की CRE-3 भर्ती प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। वायरमैन पद से जुड़े मामले में बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी की पहचान पर संदेह हुआ। दस्तावेजों और फोटो के मिलान में अंतर सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा नामजद आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस मामले में प्रतिरूपण, कूटरचित दस्तावेजों और भर्ती के जरिए नियुक्ति हासिल करने से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
जयपुर से जुड़े आरोपी की गिरफ्तारी, कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून प्रमेंद्र सिंह डोबाल के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलूनी के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम गठित की गई। विवेचना और पूछताछ के बाद पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को अशोक कुमार मीणा (40) पुत्र स्व. रामकरण मीणा, निवासी ग्राम चौरवाड़ा, पोस्ट टोडा भाटा, थाना बस्सी, जनपद जयपुर, राजस्थान को गिरफ्तार किया है। उसका वर्तमान पता प्लॉट नंबर 35, अरविंद नगर, जगतपुरा, जयपुर बताया गया है।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तारी के आधार और कारणों की जानकारी देते हुए आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आदेश के बाद उसे जिला कारागार देहरादून भेज दिया गया। दूसरा आरोपी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है। इस मामले में नामजद विकास कुमार मीणा, पुत्र धनफूल मीणा, निवासी जटाली ढाणी, काली पहाड़ी, जनपद दौसा, राजस्थान घटना के बाद से फरार बताया गया है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित प्रतिरूपण कैसे किया गया, पहचान संबंधी दस्तावेजों में अंतर की क्या भूमिका रही और नियुक्ति हासिल करने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों तथा इस मामले में किसी को अनुचित लाभ मिलने के पहलुओं की भी जांच कर रही है।
बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान खुला पहचान का राज पुलिस के अनुसार, 17 अक्तूबर 2026 को एम्स ऋषिकेश में CRE-3 भर्ती प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान वायरमैन पद के लिए उपस्थित विकास कुमार मीणा की पहचान को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ। उपलब्ध मूल अभिलेखों और पहचान-पत्रों का मिलान करने पर प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि परीक्षा में शामिल होने वाले व्यक्ति और एम्स में नियुक्त होकर कार्यभार ग्रहण करने वाले व्यक्ति की पहचान अलग-अलग हो सकती है। दोनों पहचान-पत्रों पर विवरण समान होने के बावजूद तस्वीरों में अंतर पाया गया। इसी संदिग्ध अंतर ने पूरे मामले की जांच का रास्ता खोल दिया।
अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा
मामले को लेकर एम्स ऋषिकेश के सहायक प्रशासनिक अधिकारी विक्रम सिंह ने पुलिस चौकी एम्स में लिखित शिकायत दी। शिकायत और विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमा अपराध संख्या 543/2026 दर्ज किया गया।पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 337, 338, 340(2) और 61(2) के तहत अभियोग पंजीकृत कर विवेचना शुरू की। मामले की जांच उपनिरीक्षक बिनेश कुमार को सौंपी गई। इन धाराओं 318(4), 319(2), 336(3), 337, 338, 340(2) एवं 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) में मुकदमा दर्ज किया गया है।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम
प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ उपनिरीक्षक नवीन जोशी, उपनिरीक्षक बिनेश कुमार, हेड कांस्टेबल संदीर राठी, अपर उपनिरीक्षक मुकेश शर्मा, कांस्टेबल बृजेश, कुलदीप शामिल रहे।
