79वें निरंकारी संत समागम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, सतगुरु के दिव्य संदेश से आलोकित हुई चेतना
खबर काम की
ऋषिकेश। ‘‘हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही सच्ची जागृति है।’’ उक्त दिव्य उद्गार निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन अपने प्रेरणादायी प्रवचनों के माध्यम से व्यक्त किए। समालखा की पावन धरा पर देश-विदेश से सम्मिलित लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने प्रेम, श्रद्धा और एकत्व का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। सतगुरु के पावन दर्शनों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और समूचा वातावरण भक्ति, समर्पण एवं आत्मिक आनंद से आलोकित हो गया। गुरु और गुरसिख का यह पावन मिलन प्रेम, मानवता और विश्वबंधुत्व की भावना को साकार करता दिखाई दिया।
सतगुरु माता ने श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन और हर पल निराकार प्रभु का अनुभव ही आध्यात्मिक जीवन का सार है। परमात्मा अटल सत्य है, किन्तु हमारी इच्छाएँ और परिस्थितियाँ निरंतर बदलती रहती हैं। अनुकूल परिस्थितियों में आस्था बनाए रखना सरल होता है, परंतु सच्ची भक्ति वही है जो हर परिस्थिति में अडिग रहे। माता ने आगे फरमाया कि ब्रह्मज्ञान से प्राप्त जागृति जीवनभर सजग और सचेत रहने की प्रेरणा देती है। यह जागृति हमारे व्यवहार, निर्णयों और सामाजिक जीवन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। अन्याय के विरुद्ध खड़े होते समय हमें अपने उद्देश्य को अवश्य परखना चाहिए कि हमारा प्रयास वास्तव में भलाई के लिए है या अहंकार, स्वार्थ और दिखावे के लिए। विचारों में भिन्नता होने पर भी प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का अंश देखकर उसे अपनाना ही निष्काम प्रेम की सच्ची पहचान है।
सतगुरु माता के दिव्य प्रवचनों से पूर्व निरंकारी राजपिता रमित ने जागरूकता का संदेश देते हुए समझाया कि जीवन में जहाँ परिवर्तन संभव हो, वहाँ सकारात्मक प्रयास करने चाहिए और जहां परिवर्तन असंभव हो, वहाँ परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
राजपिता ने आगे कहा कि मनुष्य संसार की आवश्यकताओं और भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति तो सजग रहता है, लेकिन अक्सर अपनी आत्मा की वास्तविक प्यास को अनदेखा कर देता है। परमात्मा के प्रेम और उसकी सर्वव्यापकता को पहचानना, अहंकार का त्याग करना तथा सच्ची जिज्ञासा, श्रद्धा और समर्पण के साथ जीवन व्यतीत करना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति है।
इस पावन अवसर पर हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु के पावन आशीष को प्राप्त किया। साथ ही, कई पार्षदों और विधायकों ने भी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित के पावन दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
दिव्यांग संत महात्माओ हेतु व्यवस्थाएंः समागम में दिव्यांग संत-महात्माओं की सुविधा के लिए सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर का प्रबंध किया गया था, ताकि वे आसानी से समारोह स्थल तक पहुंच सकें। उनके ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ कार्यक्रमों को देखने के लिए LED स्क्रीन भी लगाई गई थी। इसके अतिरिक्त, उन्हें समागम के दौरान सतगुरु के पावन दर्शन का भी लाभ मिला।
कायरोप्रैक्टिक शिविर एवं स्वास्थ्य सेवाएँः समागम में मिशन के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा व्यापक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। परिसर में 8 एलोपैथिक और 6 होम्योपैथिक डिस्पेंसरी, 15 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, एक कायरोप्रैक्टिक शिविर तथा 15 आईसीयू सुविधाओं सहित 120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल बनाया गया। आपातकालीन सेवाओं के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एम्बुलेंस जिसमें 15 वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस का प्रबंध किया गया।
समागम के दौरान काइरोप्रैक्टिक शिविर में विदेशों और भारत से विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इन निस्वार्थ चिकित्सकों की उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल और उपचार से हजारों अस्वस्थ लाभान्वित हुए। इसके अतिरिक्त, ईएनटी, नेत्र, बाल रोग, दंत चिकित्सा एवं मनोरोग सहित विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा श्रद्धालुओं को व्यापक और सटीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
लंगर एवं कैंटीन व्यवस्थाः समागम परिसर में चार स्थानों पर सामुदायिक भोजन (लंगर) की व्यवस्था की गई, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं को दिन-रात भोजन उपलब्ध कराया गया। सभी को एक साथ बैठकर लंगर ग्रहण करते देख ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना साकार होती दिखाई दी। इसके अतिरिक्त 22 कैंटीनों में रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी एवं मिनरल वाटर उपलब्ध कराया गया। इन सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सेवा, समानता और सहयोग की भावना को भी उजागर किया।
