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नैनीताल (सीनियर रिपोर्टर)। हाईकोर्ट ने पौड़ी जिले की स्वर्गाश्रम-जौंक नगर पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई की। राज्य सरकार और नगर पंचायत से तीन हफ्ते के भीतर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा। अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। पूरे मामले में याचिकर्ता ने आउटसोर्स एजेंसी जस्टिन ग्लोबल सहित सात लोगों को पार्टी बनाया है।
नगर पंचायत स्वर्गाश्रम में हुए कथित भ्रष्टाचार का मामला अब माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल पहुंच गया है। विभिन्न राज्य स्तरीय पटलों पर सुनवाई न होने से क्षुब्ध होकर सामाजिक कार्यकर्ता शुभम झा द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने इस गंभीर मामले में उत्तराखंड सरकार से जानकारी और स्पष्टीकरण रिपोर्ट तलब की है। मिली जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत स्वर्गाश्रम-जौंक में हुए व्यापक भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने के लिए शुभम झा द्वारा लंबे समय से प्रयास किया जा रहा था। उन्होंने शासन और प्रशासन के विभिन्न उच्च अधिकारियों और राज्य स्तरीय पटलों पर साक्ष्यों के साथ शिकायतें दर्ज कराई थीं। परंतु प्रशासनिक उदासीनता और मामले पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण आखिरकार उन्हें न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इस याचिका में राज्य सरकार के साथ-साथ नगर पंचायत स्वर्गाश्रम-जौंक और संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रवि बिष्ट पैरवी कर रहे हैं। 01 जून को माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं माननीय न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को इस पूरे प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट करने और जानकारी निर्देश प्राप्त कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद का समय नियत किया है। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब शासन और नगर पंचायत प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस भ्रष्टाचार के मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।
