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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में विद्यार्थियों को ‘गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति’ और ‘डॉ. भीमराव आंबेडकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति’ प्रदान की। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केंद्र और ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ और उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका ‘संस्कृत वार्ता’ का विमोचन भी किया।
मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल पर्वतों और मंदिरों से नहीं, बल्कि देववाणी संस्कृत से भी है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित और दर्शन की जड़ें संस्कृत में निहित हैं। उन्होंने संस्कृत को अतीत की स्मृति ही नहीं, भविष्य की संभावना बताते हुए इसके वैज्ञानिक व्याकरण की सराहना की और पाणिनि की अष्टाध्यायी को विश्व के लिए आश्चर्य बताया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सतत प्रयास हो रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने पर बल दिया गया है। एआई के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु कई नवाचार किए गए हैं और विश्वविद्यालय में सुविधाओं का विस्तार किया गया है। मौके पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय, निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी आदि मौजूद थे।
