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ऋषिकेश (रिपोर्टर)। त्रिवेणी घाट पर जीतिया पर्व मनाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी है, क्योंकि इस त्योहार पर लोग अपने पुत्रों के लिए उपवास रखते हैं और पवित्र नदियों में स्नान कर संतान की दीर्घायु की कामना करते हैं। हालांकि, त्रिवेणी घाट एक पवित्र स्थान है जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियाँ मिलती हैं और यह ऋषिकेश में स्थित है, लेकिन जीतिया पर्व से जुड़े स्नान प्रयागराज के संगम में होते हैं। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।

सुबह से ही महिलाओं में व्रत को लेकर उत्साह देखा गया। व्रती महिलाओं ने प्रातःकाल स्नान किया। इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की। साथ ही निर्जला उपवास का संकल्प लिया। पूरे दिन धार्मिक माहौल रहा। कई स्थानों पर महिलाओं ने समूह बनाकर कथा सुनी। भक्ति गीत भी गाए। व्रत के दौरान महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल ग्रहण नहीं करतीं। वे संतान के मंगल की कामना करती हैं।

व्रत खोलने से पहले महिलाओं ने भगवान को विभिन्न पकवानों का भोग लगाया। साग, पूड़ी, चना, अरवा चावल और अन्य परंपरागत व्यंजनों का प्रसाद बनाया गया। गांव-गांव में धार्मिक वातावरण रहा। जितिया व्रत धार्मिक आस्था का प्रतीक है। यह सामाजिक एकता और संस्कृति को जीवंत रखता है।यह उपवास 15 सितंबर को पूरा होगा। उस दिन सुबह 03:06 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी। इसके बाद महिलाएं स्नान करके तुलसी में जल अर्पित करके नियम अनुसार व्रत का पारण कर सकती हैं।
