पर्यावरणविद स्व. बहुगुणा की स्मृति में “सुंदर मधु वाटिका” का लोकार्पण 

 

 

खबर काम की
थानों देहरादून: आज थानों स्थित प्रख्यात पर्यावरणविद स्व. सुंदरलाल बहुगुणा स्मृति भवन पर मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं “सुंदर मधु वाटिका” का भव्य लोकार्पण संपन्न हुआ।

यह कार्यक्रम उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के सहयोग से, ILSEF द्वारा क्रियान्वित तथा कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (IATR) के तकनीकी मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

इस अवसर पर UCOST के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का लोकार्पण अतिथियों के कर कमलों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में श्री राजीव नयन बहुगुणा की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने संबोधन में पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण जी ने मधुमक्खियों को “प्रकृति की संवाहक” बताते हुए उनके संवर्धन एवं संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खियां न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, बल्कि इन्हें प्रकृति की धरोहर मानते हुए संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

UCOST के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर ग्रामीण युवाओं के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करना परिषद की प्राथमिकता है। “ सुंदर मधु वाटिका ” इसी दिशा में एक आदर्श मॉडल बनेगी।

इस अवसर पर कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमित उपाध्याय, मधुमक्खी प्रशिक्षक श्री नवीन नौटियाल, श्री मनमोहन सिंह बिष्ट, सुश्री वैशाली थापा सहित अनेक प्रतिभागियों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के अंतर्गत IATR के विशेषज्ञों द्वारा “आधुनिक तकनीकों से शहद उत्पादन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला भी आयोजित की गई। कार्यशाला में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन, उन्नत बॉक्स प्रबंधन, मौसमीय देखभाल, रोग नियंत्रण, गुणवत्ता युक्त शहद निष्कर्षण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन के व्यवहारिक पहलुओं पर सघन प्रशिक्षण दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों एवं युवाओं को Apis cerana indica आधारित स्वरोजगार के नए अवसरों की जानकारी प्राप्त हुई।

यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि एवं ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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