स्वतंत्रता दिवस पर आवाज़ साहित्यिक संस्था ऋषिकेश को मिला राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2025

 

 

 

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नई दिल्ली (सीनियर रिपोर्टर)। 15 अगस्त को नई दिल्ली NDMC कन्वेंशन सेंटर में ऋषिकेश की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था आवाज़ को भारत की प्रतिष्ठित संस्थाओं/ प्रतिभाओं मे सम्मान दिया गया यह सम्मान भारत की तीनों सेनाओं एवं पुलिस प्रशासन से सेवानिवृत अधिकारियों के द्वारा प्रदान किया गया, यह सम्मान
समाज में शिक्षा, साहित्य, लोकसंस्कृति ,लोक भाषा और विशेष जनजागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए दिया गया है। यह सम्मान यस फाउंडेशन, नई दिल्ली और International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies के संयुक्त तत्वावधान में दिया गया है जो भारत सरकार द्वारा अनुदानित संस्था है इस संस्था की स्थापना देश की तीनों सेनाओं एवं केंद्रीय पुलिस से सेवानिवृत अधिकारियों द्वारा किया गया है जो संपूर्ण राष्ट्र में शिक्षा स्वास्थ्य के अतिरिक्त अनेकों जन जागरण के कार्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योग दान देती है।

प्रतिवर्ष समाज शिक्षा साहित्य संस्कृति के लिए जो प्रतिभाएं /संस्थाएं विशेष योगदान देती हैं उन्हें प्रशस्तिपत्र, उत्तरीय स्मृति चिन्ह गोल्ड मेडल के साथ पारितोषिक राशि द्वारा सम्मानित किया जाता है ।
पूरे देशभर से चयनित 100 विशिष्ट प्रतिभागियों में “आवाज़ संस्था” को भी यह गौरव हासिल हुआ है। यह चयन संस्था द्वारा लंबे समय से लोकभाषा, साहित्य, शिक्षा और समाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे सराहनीय प्रयासों के आधार पर किया गया है।

आवाज़ साहित्यिक संस्था डिजिटल कार्यक्रम के संस्थापक और आवाज़ के सह सचिव डॉ सुनील दत्त थपलियाल को यह
सम्मान राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त 2025 को NDMC कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली मे प्रदान किया गया है।

इस उपलब्धि के लिए आवाज़ संस्था के संस्थापक डॉ. सुनील दत्त थपलियाल और उनकी पूरी टीम को साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक जगत से बधाई एवं शुभकामनाएं मिल रही है।
संपूर्ण उत्तराखंड से शिक्षा, साहित्य, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं मे गढ़ भूमि लोक संस्कृति संरक्षण समिति ढालवाला, आवाज़ साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था ऋषिकेश, गंगा सेवा पर्यावरण संरक्षण समिति ऋषिकेश, गो गंगा संरक्षण समिति, रंत रैबार, गढ़ भोज, गढ़वाल सभा ,वरिष्ठ नागरिक संगठन ऋषिकेश आदि ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

डॉ सुनील दत्त थपलियाल ने इस सम्मान को प्राप्त करने का श्रेय अपनी आवाज़ साहित्यिक संस्था के समस्त पदाधिकारियों एवं दर्शकों को दिया है आज भी आवाज साहित्यिक संस्था का पेज साहित्य, संस्कृति संवाद के साथ अनेक उपयोगी सामाजिक शैक्षणिक गतिविधियों को देश विदेश से 8 लाख लोगों के बीच प्रसारित कर रही हे।

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